तहज़ीब के खण्डहर
आज के बिगड़े हुए माहौल के मंजर न दो
ये तो खिलते फूल है, डाकुओ के चम्बल न दो
ये अभी बच्चे है, अपनी काट लेंगे अंगुलियाँ
हाथ में इनके कोई चाक़ू या ख़ंजर न दो
इनकी आँखों में अभी जलते है ख्वाबो के दिए
इन निगाहों में अभी धुल के अंधड़ न दो
ये न हो दुनिया के जंगल में भटकते रहे
रास्ता इन्हें कोई तो दो चाहे कोई मंजिल न दो
ये तुम्हे देख कर सीखेंगे जीने का चलन
तुम विरासत में इन्हें तहज़ीब के खण्डहर ना दो
आज के बिगड़े हुए माहौल के मंजर न दो
ये तो खिलते फूल है, डाकुओ के चम्बल न दो
ये अभी बच्चे है, अपनी काट लेंगे अंगुलियाँ
हाथ में इनके कोई चाक़ू या ख़ंजर न दो
इनकी आँखों में अभी जलते है ख्वाबो के दिए
इन निगाहों में अभी धुल के अंधड़ न दो
ये न हो दुनिया के जंगल में भटकते रहे
रास्ता इन्हें कोई तो दो चाहे कोई मंजिल न दो
ये तुम्हे देख कर सीखेंगे जीने का चलन
तुम विरासत में इन्हें तहज़ीब के खण्डहर ना दो
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