लो चलो, आज मैं
बांध ही दू अपनी सांसो पे
तेरे लिए, छोटा सा मन्नत का धागा।
नाम तेरा लेकर कह दू धड़कन को,
देख तुझसे ही जा उलझा,
मेरे मोह का ये धागा
चाँद मलिन सा हो जाये क्यू फिर सूरज
आँख चुराए,
मेरे मन्नत की ताक़त से कभी, तुझपे
आंच न आये।
रूह छुपा के डोले तुझको जब काली
नज़रे जो भरमाए।
हाथो पर बरबस खिंच आते है आभारी
रेखाओ के साये।
पांव जहा भी पड़ जाये तेरे, मेरे रोम-रोम
के तारे गुजरे,
अनहोनी की चिट्ठियों को लेकर,मैं
ऐसी गांठ लगा दू,
मन्नत की जंजीर बना दूँ
निशा
बांध ही दू अपनी सांसो पे
तेरे लिए, छोटा सा मन्नत का धागा।
नाम तेरा लेकर कह दू धड़कन को,
देख तुझसे ही जा उलझा,
मेरे मोह का ये धागा
चाँद मलिन सा हो जाये क्यू फिर सूरज
आँख चुराए,
मेरे मन्नत की ताक़त से कभी, तुझपे
आंच न आये।
रूह छुपा के डोले तुझको जब काली
नज़रे जो भरमाए।
हाथो पर बरबस खिंच आते है आभारी
रेखाओ के साये।
पांव जहा भी पड़ जाये तेरे, मेरे रोम-रोम
के तारे गुजरे,
अनहोनी की चिट्ठियों को लेकर,मैं
ऐसी गांठ लगा दू,
मन्नत की जंजीर बना दूँ
निशा
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